रात के ग्यारह बज चुके थे। कॉलेज का farewell खत्म होने लगा था। Auditorium का music बंद हो चुका था, lawn की fairy lights आधी बुझ चुकी थीं और campus धीरे-धीरे खाली हो रहा था। लेकिन तारा अभी भी पुरानी library की तीसरी मंज़िल पर थी। उसके हाथ में वही मोटी hardcover book थी, जिसके अंदर पिछले छह महीनों से उसे छोटे-छोटे anonymous notes मिल रहे थे।
उसने आज का note खोला— “तुम जब किसी बात पर नाराज़ होकर अपने बाल पीछे करती हो, तब मुझे तुम्हें देखना बंद कर देना चाहिए… पर मैं कभी कर नहीं पाता।” तारा के होंठों पर अनचाही smile आ गई। यह बारहवाँ note था। कोई नाम नहीं, कोई “I love you” नहीं; बस उसकी छोटी-छोटी आदतें, जिन्हें शायद उससे ज्यादा किसी और ने notice किया था।
“बारहवाँ भी संभालकर रखोगी?” पीछे से आवाज़ आई। तारा पलटी। दरवाज़े के पास विहान खड़ा था— white shirt की sleeves forearms तक rolled, tie गायब, top buttons खुले और चेहरे पर वही irritating half-smile। तारा ने note तुरंत बंद कर लिया। “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” उसने पूछा। “शायद वही जो तुम कर रही हो।” “मैं चोरी नहीं कर रही।” विहान ने उसके हाथ की book देखी। “और मैं anonymous notes नहीं लिखता।”
तारा की आँखें सिकुड़ गईं। “तुम्हें कैसे पता ये anonymous notes हैं?” विहान की smile एक पल के लिए रुक गई। वही एक पल काफी था। तारा धीरे से बोली, “ये… तुम थे?” जवाब आने से पहले नीचे कहीं भारी आवाज़ हुई और library का automatic door lock हो गया। उसी समय बिजली चमकी और पूरी building अँधेरे में डूब गई।
“Perfect,” तारा ने phone निकालते हुए कहा। “दो साल से जिस आदमी को tolerate कर रही हूँ, उसी के साथ dark library में lock हो गई।” विहान ने flashlight जलाई। “दो साल से tolerate कर रही हो?” वह थोड़ा करीब आया। “फिर मेरे सारे notes क्यों रखे हैं?” तारा ने उन्हें मुट्ठी में दबा लिया। “पहले ये बताओ लिखा क्यों?” “क्योंकि सामने बोलता तो तुम हँस देती।” “Anonymous notes mature idea था?” विहान ने shoulder उचका दिया। “Mature नहीं था… लेकिन तुमने एक भी फेंका नहीं। तो पूरी तरह बेकार भी नहीं था।”
तारा arched window के पास चली गई। बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी और ठंडी हवा उसके loose hair को चेहरे पर ला रही थी। Farewell के लिए उसने midnight-blue satin fitted midi dress पहनी थी; soft sweetheart neckline, thin straps और एक side slit के साथ। उसने बाहें fold कीं और धीमे से कहा, “कल सुबह Bangalore जा रही हूँ।”
विहान के चेहरे से मज़ाक गायब हो गया। “कब decide किया?” “दो हफ्ते पहले।” “और मुझे कब बताने वाली थीं?” तारा पलटी। “तुम कौन हो जिसे मुझे बताना जरूरी था?” विहान कुछ seconds चुप रहा, फिर हल्के से हँसा। “Exactly. यही problem है। तुम्हारी coffee का order पता है। Presentation से पहले तुम left thumbnail काटती हो, पता है। तुम nervous होती हो तो bracelet घुमाती हो, वो भी पता है… लेकिन मैं तुम्हारी life में हूँ कहाँ, ये नहीं पता।”
तारा ने अनजाने में अपनी silver bracelet को घुमाना बंद कर दिया। “तुम irritating हो।” “Safe answer.” “Overconfident.” “Second safe answer.” “Annoying.” विहान उसके सामने आकर रुक गया। “और?” तारा ने उसकी आँखों में देखा, फिर एक पल के लिए उसके खुले collar पर नज़र चली गई। विहान ने notice कर लिया। “और कुछ नहीं,” वह बोली और निकलने लगी।
विहान ने उसे छुआ नहीं। बस पीछे से कहा, “मेरी तरफ देखकर बोल दो कि notes पढ़कर तुम्हें कभी कुछ feel नहीं हुआ।” तारा रुक गई। वह पलटी, उसकी आँखों में देखा… मगर शब्द नहीं निकले। विहान के चेहरे पर जीत वाली smile नहीं थी। सिर्फ softness थी। “यही तो,” उसने बहुत धीमे कहा।
Also Read- नदी के उस पार तुम – Sad Love Story in Hindi
एक जोरदार हवा का झोंका window से अंदर आया। तारा की bracelet book के metal corner में अटक गई। “Damn…” वह उसे छुड़ाने लगी। “Wait,” विहान उसके सामने आया। उसने बहुत धीरे bracelet को खोलना शुरू किया। उसकी उँगलियाँ तारा की कलाई को मुश्किल से छू रही थीं, फिर भी तारा की साँस बदल गई।
“Done.” विहान पीछे हटने लगा, लेकिन तारा ने उसकी rolled sleeve पकड़ ली। वह वहीं रुक गया। “Notes अचानक बंद क्यों कर दिए थे?” तारा ने पूछा। विहान ने आँखें दूसरी तरफ कर लीं। “मैंने तुम्हें Kunal के साथ देखा था।” तारा के eyebrows ऊपर चले गए। “वो मेरा cousin है।” विहान ने आँखें बंद कर लीं। “Fantastic.” तारा की हँसी निकल गई। “Department topper होकर इतना भी पता नहीं किया?” “उस दिन research से ज्यादा jealousy में interest था।”
तारा की हँसी धीरे-धीरे खत्म हुई। विहान उसे देखता रहा। “ऐसे मत देखो,” उसने कहा। “कैसे?” “तुम्हें पता है।” वह एक कदम करीब आया, मगर आख़िरी दूरी छोड़ दी। “तुम चाहती हो मैं पीछे हट जाऊँ?” तारा ने उसकी आँखों में देखा। “पता नहीं।” विहान ने सिर हिलाया। “तो जब पता हो तभी आगे बढ़ूँगा।”
कुछ seconds तक सिर्फ बारिश की आवाज़ थी। फिर तारा ने खुद दूरी खत्म की। उसने हाथ उठाकर उसकी shirt का collar ठीक किया। उसकी उँगलियाँ वहीं ठहर गईं। “तुम हमेशा इतने confident रहते हो?” “नहीं।” “झूठ।” “अभी बिल्कुल नहीं।” “क्यों?” विहान ने उसकी आँखों से नज़र नहीं हटाई। “क्योंकि अगर मैंने तुम्हें अभी गलत समझ लिया… तो शायद जो कुछ भी हमारे बीच है, वो भी खत्म हो जाएगा।”
“हमारे बीच है क्या?” तारा ने फुसफुसाकर पूछा। विहान बहुत हल्का मुस्कराया। “दो साल से वही पता लगाने की कोशिश कर रहा हूँ।”
तारा की उँगलियाँ अभी भी उसकी collar के पास थीं। विहान ने बहुत धीरे पूछा, “क्या मैं तुम्हें kiss कर सकता हूँ?” तारा ने जवाब नहीं दिया। उसने बस collar को थोड़ा अपनी तरफ खींच लिया।
विहान पहले उसके माथे के पास रुका। दोनों की साँसें एक-दूसरे से टकराईं। तारा ने आँखें बंद कर लीं और अगले ही पल उसने उसे चूम लिया। Kiss धीमा था— बिना जल्दबाज़ी के, जैसे दोनों यह समझना चाहते हों कि यह सिर्फ attraction है या दो साल से दबा हुआ कुछ और।
तारा की उँगलियाँ उसकी shirt पर कस गईं। विहान का एक हाथ उसकी कमर पर आया और वहीं रुक गया। तारा खुद थोड़ा और उसके करीब आई। इस बार kiss ज्यादा intense हुआ। उसका दूसरा हाथ विहान की गर्दन के पीछे चला गया और विहान की हथेली उसकी upper back पर ठहर गई। कुछ seconds बाद तारा अलग हुई, मगर इतनी नहीं कि दूरी वापस आ सके।
“ये भी anonymous रहेगा?” उसने softly पूछा। विहान हँस पड़ा। “तुम impossible हो।” “और फिर भी छह महीने notes लिखते रहे।” “Worst decision.” तारा ने eyebrow उठाई। “Really?” वह फिर थोड़ा करीब आया। “Not even remotely.”
तभी generator चला और library की एक row में warm lights जल उठीं। तारा bookshelf के पास टिक गई। अब विहान उसे साफ देख सकता था— loose hair, midnight-blue satin dress, bare shoulders और वह expression जिसे वह शायद बहुत समय से पढ़ना चाहता था। उसने पूछा, “कल कितने बजे?” “Seven.” “Train?” “हाँ।” उसने सिर हिलाया। “Okay.”
तारा का चेहरा तुरंत बदल गया। “बस Okay?” विहान ने हल्की साँस छोड़ी। “क्या कहूँ? Stay? एक kiss के बाद तुम्हें job छोड़ने को बोल दूँ?” तारा ने उसकी chest पर हथेली रख दी। “बहुत sensible बन रहे हो।” “हाँ,” उसने कहा, “अंदर से बिल्कुल sensible नहीं हूँ।”
“अगर मैं चली गई तो?” तारा ने पूछा। “तो जाओ।” उसका expression गिरते देखकर विहान तुरंत मुस्कराया। “और मैं रोज़ call करूँगा। तुम ignore करोगी तो notes भेजूँगा।” “Bangalore तक?” “Courier महँगा पड़ेगा। WhatsApp चलेगा।” तारा हँस दी, लेकिन आँखों में हल्की नमी आ गई।
विहान ने उसके cheek के पास आया आँसू अंगूठे से साफ किया। “Hey.” तारा ने उसकी shirt पकड़कर उसे दोबारा करीब खींच लिया। “मुझे farewell में रोना नहीं था।” “Technically farewell खत्म हो चुका है।” इस बार kiss छोटा था, लेकिन पहले से ज्यादा personal। जैसे कोई impulsive moment नहीं, बल्कि बिना बोले किया गया promise।
सुबह पाँच बजे guard ने library का door खोला। दोनों बाहर निकले तो campus खाली था। बारिश रुक चुकी थी और wet pavement पर lights की reflection पड़ रही थी। Hostel road तक पहुँचकर तारा ने bag से वही hardcover book निकाली और विहान को दे दी। “ये अब तुम्हारे पास रहे।”
विहान ने book खोली। अंदर नया folded note था। उसने तुरंत उसकी तरफ देखा। “तुमने कब लिखा?” “जब तुम sensible speech दे रहे थे।” उसने note खोला। लिखा था— “अगर Bangalore पहुँचकर भी तुम्हें irritate करने का मन करता रहा… तो शायद ये सिर्फ crush नहीं है।”
विहान ने ऊपर देखा। तारा कुछ कदम आगे जा चुकी थी। “तारा!” वह पलटी। “क्या?” “बहुत खराब confession है।” तारा मुस्कराई। “तुम्हारे notes से better है।” विहान उसकी तरफ आया। इस बार उसने उसे kiss नहीं किया; बस उसका हाथ पकड़ लिया और hostel gate तक उसके साथ चलता रहा।
अगले छह महीने आसान नहीं थे। तारा Bangalore में थी, विहान Delhi में। Calls miss हुए, fights हुईं, एक बार तीन दिन तक बात भी बंद रही। लेकिन notes कभी बंद नहीं हुए। फर्क बस इतना था कि अब sender anonymous नहीं था।
दो साल बाद उसी college library की तीसरी मंज़िल पर तारा फिर खड़ी थी। इस बार midnight-blue नहीं, लेकिन वही confident smile थी। उसके हाथ में folded paper की जगह एक छोटी ring थी। विहान stairs चढ़कर आया और उसे देखते ही बोला, “इतनी देर?” तारा ने हँसकर कहा, “Library बंद होने से पहले आ गई ना।”
कुछ प्रेम कहानियाँ सही समय का इंतज़ार नहीं करतीं। कभी-कभी उन्हें बस एक बंद दरवाज़ा चाहिए होता है… जहाँ दो लोग पहली बार सच बोलने की हिम्मत कर सकें।





0 Comments