सीट नंबर 27 – Heart Touching Love Story in Hindi

               एक रात, दो अजनबी और एक ऐसी बात जो दोनों अपने भीतर वर्षों से छुपाए हुए थे। 

“ये सीट मेरी है।”

रात के साढ़े दस बजे थे।

ट्रेन चलने ही वाली थी जब सिया जल्दी-जल्दी अपना छोटा suitcase खींचती हुई coach में पहुँची।

उसकी साँस थोड़ी तेज थी। बालों की कुछ curls चेहरे के पास आ गई थीं और emerald-green satin dress पर station की पीली रोशनी हल्की चमक रही थी।

उसने ticket देखा।

27 — Lower Berth.

लेकिन सीट पर पहले से कोई बैठा था।

नavy shirt पहने एक आदमी, कानों में earphones और हाथ में किताब।

“Excuse me… ये सीट मेरी है।”

उसने ऊपर देखा।

“शायद हमारी है।”

“क्या मतलब?”

उसने ticket आगे किया।

27 — Lower Berth.

सिया ने अपना ticket फिर देखा।

वही नंबर।

“Great,” उसने थकी हुई आवाज़ में कहा, “आज यही बाकी था।”

आदमी मुस्कुराया।

“मैं कबीर।”

“मैंने नाम नहीं पूछा।”

“पता है। Situation थोड़ी कम awkward करने की कोशिश थी।”

सिया चाहकर भी मुस्कान रोक नहीं पाई।

कुछ देर बाद TTE आया। Booking error था। अगले स्टेशन तक कोई दूसरी berth खाली नहीं थी।

“थोड़ी देर adjust कर लीजिए,” वह कहकर चला गया।

सिया ने कबीर की तरफ देखा।

“हम दोनों?”

कबीर तुरंत उठ गया।

“आप बैठिए। मैं door के पास खड़ा हो जाता हूँ।”

“दो घंटे?”

“आदत है।”

“Hero बनने की?”

“नहीं। गलत booking की।”

इस बार सिया खुलकर हँस दी।

पिछले कई महीनों में शायद पहली बार।

और उसे खुद आश्चर्य हुआ कि किसी अजनबी ने उससे दो मिनट में वह हँसी निकाल ली थी जिसे वह अपने परिचित लोगों से भी छुपाती फिर रही थी।

love story in hindi

आधी रात की कॉफी

एक घंटे बाद train की pantry से कबीर दो paper cups लेकर लौटा।

“Coffee?”

सिया ने cup लिया।

“आप हर stranger को coffee offer करते हैं?”

“सिर्फ उनको जो पहले पाँच मिनट में मुझे दो बार डाँट चुके हों।”

“मैंने डाँटा नहीं था।”

“Tone याद है मुझे।”

दोनों अब एक ही berth के अलग-अलग सिरों पर बैठे थे।

Train की movement से कभी-कभी उनके घुटने हल्के से छू जाते।

हर बार सिया थोड़ा संभलकर बैठती।

तीसरी बार कबीर ने कहा—

“मैं अपना पैर काट नहीं सकता।”

सिया हँस पड़ी।

“आपको हर चीज़ पर joke करना जरूरी है?”

“नहीं।”

उसकी आवाज़ अचानक शांत हो गई।

“बस कुछ चीज़ों पर serious होना पसंद नहीं।”

“जैसे?”

कबीर ने window की तरफ देखा।

“Goodbyes.”

सिया का चेहरा थोड़ा बदल गया।

“मुझे भी।”

कुछ पल सिर्फ wheels की आवाज़ रही।

फिर train एक मोड़ पर हल्की झुकी।

सिया का coffee cup हाथ से फिसलने लगा।

कबीर ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

Cup बच गया।

लेकिन हाथ नहीं छूटा।

उसकी उंगलियाँ सिया की उंगलियों पर थीं।

कबीर ने तुरंत पकड़ ढीली कर दी।

“Sorry.”

सिया ने हाथ वापस नहीं खींचा।

बस उसकी तरफ देखकर बोली—

“Coffee बच गई।”

“हाँ।”

“तो sorry किस बात का?”

कबीर कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

“शायद आदत से।”

उस पल सिया को पहली बार लगा कि उसके सामने बैठा आदमी जितना हल्का दिखता है, उतना है नहीं।

                  Inhe bhi padhen- उस रात तुम बहुत करीब थे – Romantic Love Story in Hindi

love story in hindi

“मैं शादी करने जा रही थी।”

रात करीब एक बजे बाकी coach शांत हो चुका था।

सिया खिड़की के पास बैठी बाहर अँधेरे में भागती lights देख रही थी।

कबीर ने पूछा—

“आप कहाँ जा रही हैं?”

“देहरादून।”

“घर?”

“था।”

उस एक शब्द पर वह रुक गया।

सिया ने purse से एक छोटी-सी पुरानी photograph निकाली।

उसमें वह अपनी माँ के साथ थी।

“माँ का घर बेचने।”

कबीर ने कुछ नहीं कहा।

“छह महीने पहले चली गईं।”

“Sorry.”

“सब यही कहते हैं।”

“और क्या कहना चाहिए?”

सिया ने उसकी तरफ देखा।

“शायद कुछ नहीं।”

कबीर ने सिर हिलाया।

वह चुप हो गया।

और वही चुप्पी सिया को अच्छी लगी।

कुछ देर बाद उसने खुद बोलना शुरू किया।

“मैं अगले महीने शादी करने वाली थी।”

कबीर ने उसकी तरफ देखा।

“थी?”

“हाँ।”

उसने हल्की हँसी के साथ कहा—

“माँ के जाने के बाद मुझे अचानक समझ आया कि मैं अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सिर्फ इसलिए कर रही थी क्योंकि लोगों को वही सही लगता था।”

“और शादी?”

“वो भी।”

“उसे छोड़ दिया?”

“शादी को।”

“लड़के को?”

सिया मुस्कुराई।

“आप बहुत curious हैं।”

“आप बहुत interesting हैं।”

पहली बार वह जवाब नहीं दे पाई।

Train की ठंडी हवा vent से आ रही थी।

सिया ने bare arms को हल्का-सा समेटा।

कबीर ने अपनी beige jacket उतारी।

“नहीं, मैं ठीक हूँ।”

“मुझे पता है।”

उसने jacket उसके कंधों पर रख दी।

“फिर भी।”

उसकी उंगलियाँ jacket रखते हुए सिया के bare shoulder के पास बहुत हल्के से छू गईं।

सिया की नज़र उसकी आँखों तक उठी।

कबीर तुरंत पीछे नहीं हटा।

दोनों के बीच कुछ सेकंड की दूरी बहुत कम थी।

फिर सिया ने jacket को अपने पास खींच लिया।

“Thank you।”

“Welcome.”

“और अब पूछोगे क्यों छोड़ी शादी?”

“नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि अगर बताना होगा… तुम खुद बता दोगी।”

सिया उसे देखती रह गई।

शायद उसे पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उसकी कहानी जानना चाहता था, लेकिन उसे खोलने की जल्दी में नहीं था।

love story in hindi

प्लेटफॉर्म पर पाँच मिनट

अगले स्टेशन पर train दस मिनट रुकी।

सिया ने कहा—

“थोड़ी हवा चाहिए।”

दोनों platform पर उतर आए।

रात ठंडी थी। दुकानें लगभग बंद थीं। दूर एक tea stall खुला था।

सिया jacket कबीर को लौटाने लगी।

“रखो।”

“अब ठंड नहीं लग रही।”

“मुझे भी नहीं।”

“तो?”

“तुम पर अच्छी लग रही है।”

सिया ने आँखें सिकोड़कर उसे देखा।

“ये flirting थी?”

“बहुत खराब?”

“थोड़ी।”

“Practice कम है।”

“दिख रहा है।”

दोनों हँसे।

तभी announcement हुआ।

Train चलने वाली थी।

सिया जल्दी से मुड़ी, लेकिन heel platform के uneven हिस्से में अटक गई।

उसका संतुलन बिगड़ा।

इस बार कबीर ने उसे सिर्फ हाथ से नहीं पकड़ा।

उसका एक हाथ सिया की कमर के चारों ओर आ गया।

सिया लगभग उसके सीने से लग गई।

उनके चेहरे बेहद करीब थे।

कबीर की पकड़ firm थी, लेकिन उसने उसे तुरंत सीधा कर दिया।

फिर भी सिया हटकर खड़ी नहीं हुई।

“ठीक हो?”

“हाँ।”

कबीर का हाथ अब भी उसकी कमर के पास था।

उसने बहुत धीरे से पूछा—

“हटा दूँ?”

सिया ने उसकी आँखों में देखा।

“Train छूट जाएगी।”

“ये answer नहीं है।”

उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई।

“तो अभी मत हटाओ।”

दो सेकंड।

बस इतने ही।

फिर दोनों हँसते हुए coach की तरफ दौड़े।

लेकिन उस स्पर्श के बाद उनकी बातचीत में कुछ बदल चुका था।

अब attraction किसी गलतफहमी का हिस्सा नहीं था।

दोनों उसे पहचान चुके थे।

love story in hindi

सुबह होने से पहले

देहरादून आने में बीस मिनट बाकी थे।

सिया और कबीर अब फिर उसी berth पर बैठे थे।

इस बार उनके बीच जानबूझकर ज्यादा दूरी नहीं थी।

सिया ने पूछा—

“तुम कहाँ जा रहे हो?”

“ऋषिकेश।”

“क्यों?”

कबीर ने कुछ देर बाद कहा—

“मेरी छोटी बहन वहाँ रहती है।”

“बस?”

“मैं पिछले साल तक शादीशुदा था।”

सिया चुप हो गई।

“Divorce?”

“नहीं।”

उसकी आवाज़ बेहद शांत थी।

“वो नहीं रही।”

सिया का दिल जैसे अचानक भारी हो गया।

अब उसे उसके “goodbyes” वाले जवाब का मतलब समझ आया।

“कबीर…”

“तीन साल हो गए।”

वह हल्का-सा मुस्कुराया।

“सब कहते हैं move on करो। जैसे कोई switch हो।”

सिया ने उसकी तरफ देखा।

फिर बिना कुछ कहे उसका हाथ पकड़ लिया।

इस बार fingers accident से नहीं मिली थीं।

कबीर ने नीचे उनके जुड़े हुए हाथों को देखा।

“तुम्हें कुछ कहना नहीं है?”

“तुमने खुद कहा था… कभी-कभी कुछ नहीं कहना चाहिए।”

उसकी आँखों में पहली बार नमी और मुस्कान एक साथ आई।

कुछ देर बाद सिया ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।

कबीर ने उसे और करीब खींचने की कोशिश नहीं की।

बस अपना सिर हल्के से उसके सिर से टिका दिया।

“कबीर?”

“हूँ?”

“ये रात खत्म होने के बाद हम अजनबी बन जाएंगे?”

उसने तुरंत जवाब नहीं दिया।

फिर अपना phone उसकी तरफ बढ़ाया।

“ये तुम्हारे ऊपर है।”

सिया ने number type किया।

फोन वापस देते हुए बोली—

“मैं अभी किसी relationship के लिए ready नहीं हूँ।”

“मैं भी नहीं।”

“तो?”

“Coffee?”

सिया मुस्कुरा दी।

“देहरादून में?”

“जब तुम ready हो।”

“और अगर छह महीने लगे?”

“मैंने तीन साल इंतज़ार करना सीखा है।”

सिया की आँखें भर आईं।

Train धीमी होने लगी।

सुबह की पहली रोशनी window से भीतर आ रही थी।

सिया ने उसके कंधे से सिर उठाया।

दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे को देखते रहे।

कोई kiss नहीं।

कोई बड़ा promise नहीं।

बस कबीर ने उसकी हथेली को हल्के से दबाया।

और उस रात की सबसे खूबसूरत बात शायद यही थी—

दोनों एक-दूसरे को बचाने नहीं आए थे।

दोनों खुद टूटे हुए थे।

फिर भी कुछ घंटों के लिए उन्होंने एक-दूसरे को यह एहसास दिला दिया कि टूटने के बाद भी किसी के पास बैठना अच्छा लग सकता है।

कभी-कभी Heart Touching Love Story in Hindi की शुरुआत “I Love You” से नहीं होती।

कभी वह सिर्फ इतने से शुरू होती है—

“जब तुम तैयार हो… coffee?”

love story in hindi






More Stories

0 Comments