आर्या ने दरवाज़ा खोला तो कुछ पल उसे यकीन ही नहीं हुआ।
विराज सामने खड़ा था।
हल्की बारिश से उसके बाल भीगे हुए थे, काली shirt की बाँहें मुड़ी थीं और चेहरे पर वही धीमी-सी मुस्कान थी जिसे आर्या पिछले छह महीनों से सिर्फ video calls में देख रही थी।
“तुमने कहा था अगले हफ्ते आओगे।”
“सोचा surprise अच्छा रहेगा।”
आर्या ने जवाब नहीं दिया।
बस उसे देखती रही।
छह महीने लंबा समय नहीं होता, अगर सिर्फ calendar देखो। मगर किसी ऐसे इंसान से दूर रहो जिसकी आदत सुबह की coffee जैसी हो चुकी हो, तो छह महीने बहुत होते हैं।
विराज ने धीरे से पूछा, “अंदर नहीं बुलाओगी?”
आर्या जैसे होश में आई।
“आओ।”
वह अंदर आया। दरवाज़ा बंद हुआ।
और अचानक बाहर की पूरी दुनिया उनसे कट गई।
कमरे में हल्की पीली रोशनी थी। Balcony का दरवाज़ा थोड़ा खुला था और बारिश की ठंडी हवा पर्दे को धीरे-धीरे हिला रही थी।
विराज ने उसे ऊपर से नीचे नहीं देखा।
उसने सिर्फ उसकी आँखों में देखा।
और शायद वही नज़र ज्यादा खतरनाक थी।
“क्या?” आर्या ने पूछा।
“तुम बिल्कुल वैसी ही हो।”
“छह महीने में क्या बदल जाना था?”
विराज थोड़ा करीब आया।
“तुम्हें देखकर लगता है… बहुत कुछ।”
आर्या के होंठों पर हल्की मुस्कान आई, मगर उसने नजरें नीचे कर लीं।
कुछ देर बाद दोनों balcony के पास खड़े थे।
आर्या ने उसके लिए coffee बनाई थी, मगर coffee दोनों के हाथों में ठंडी हो रही थी।
“फोन पर तुम बहुत बोलती हो,” विराज ने कहा।
“और सामने?”
“सामने मुझे देखकर चुप हो जाती हो।”
“ऐसा कुछ नहीं है।”
विराज हल्का-सा झुका।
“अभी भी?”
आर्या ने उसकी तरफ देखा।
उनके बीच शायद एक हाथ जितनी दूरी थी।
“तुम बहुत बदल गए हो।”
“अभी तो कहा मैं वैसा ही हूँ।”
“Confidence बढ़ गया है।”
“Distance ने सिखाया।”
आर्या हँस दी।
विराज की नजर एक पल उसके चेहरे पर ठहर गई।
फिर हवा से उसके बाल आगे आ गए।
उसने हाथ उठाया।
लेकिन छूने से पहले रुक गया।
आर्या ने उसके रुकने को notice किया।
“क्या हुआ?”
“कुछ नहीं।”
“तो हाथ क्यों रोका?”
विराज कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
फिर बहुत धीरे से बालों की लट उसके चेहरे से हटाकर कान के पीछे कर दी।
उसकी उंगलियाँ आर्या के गाल को छूकर गुज़रीं।
आर्या की साँस बदल गई।
“अब ठीक?” उसने पूछा।
विराज की आवाज़ पहले से धीमी थी।
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि छह महीने तक तुम्हें छू नहीं पाया… और अब एक बार छूकर normal behave करना मुश्किल हो रहा है।”
आर्या ने इस बार नजरें नहीं हटाईं।
Ise Bhi padhen- सातवीं सालगिरह की रात – Romantic Husband Wife Love Story in Hindi
आर्या पीछे हटकर sofa के पास चली गई।
“Coffee पी लो।”
विराज हँसा।
“Topic बदल रही हो?”
“हाँ।”
“क्यों?”
आर्या ने cup table पर रखा।
“क्योंकि तुम आज बहुत…”
वह रुक गई।
“बहुत क्या?”
“कुछ नहीं।”
विराज उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
“आर्या।”
उसके नाम बोलने का तरीका हमेशा से अलग था।
धीमा।
जैसे कोई शब्द नहीं, कोई एहसास बोल रहा हो।
आर्या ने सिर उठाया।
“क्या?”
“मैं तुम्हें miss करता था।”
उसका मज़ाक अचानक गायब हो गया।
“मैं भी।”
“कितना?”
“बहुत।”
“इतना?”
विराज ने अपना हाथ उसकी उंगलियों के पास रखा।
आर्या ने खुद अपनी उंगलियाँ उसकी उंगलियों में फँसा दीं।
“इससे ज्यादा।”
बस इतना कहना था।
विराज ने उसका हाथ पकड़ लिया।
दोनों कुछ देर वैसे ही खड़े रहे।
फिर आर्या ने बहुत धीरे से अपना माथा उसके सीने के पास टिका दिया।
विराज ने पहले सिर्फ उसकी पीठ पर हाथ रखा।
फिर उसे बाँहों में भर लिया।
उस embrace में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी।
फिर भी वह पहले से कहीं ज्यादा intimate था।
क्योंकि छह महीने की सारी दूरी उसी एक आलिंगन में पिघल रही थी।
आर्या की उंगलियाँ उसकी shirt के पास हल्के से कस गईं।
“विराज…”
“हूँ?”
“इतना जोर से मत पकड़ो।”
विराज तुरंत थोड़ा पीछे हुआ।
आर्या ने मुस्कुराकर उसे देखा।
“मैंने छोड़ने को नहीं कहा था।”
विराज भी मुस्कुरा दिया।
और इस बार वह खुद उसके और करीब आ गई।
“तुम्हें पता है,” आर्या ने उसके करीब रहते हुए कहा, “video call पर तुम इतने dangerous नहीं लगते।”
विराज हँसा।
“और सामने?”
आर्या ने जवाब नहीं दिया।
बस उसकी आँखों में देखती रही।
विराज का हाथ धीरे से उसके चेहरे तक आया।
इस बार उसने permission माँगने के लिए शब्द इस्तेमाल नहीं किए।
सिर्फ उसकी आँखों में देखा।
आर्या ने अपनी नजरें नहीं हटाईं।
वह जवाब था।
विराज ने उसके गाल को हथेली में लिया।
आर्या ने हल्के से अपना चेहरा उसकी हथेली की तरफ झुका दिया।
अब उनके चेहरे बहुत करीब थे।
इतने कि दोनों की साँसें एक-दूसरे को छू रही थीं।
“अब भी डर लग रहा है?” उसने फुसफुसाकर पूछा।
“तुमसे?”
“हाँ।”
आर्या के होंठों पर हल्की मुस्कान आई।
“थोड़ा।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम जानते हो मुझे कैसे चुप कराना है।”
विराज ने कुछ नहीं कहा।
वह थोड़ा झुका।
फिर रुक गया।
एक सेकंड।
दो सेकंड।
आर्या ने खुद दूरी खत्म कर दी।
चुंबन धीमा था।
बहुत छोटा।
मगर जैसे ही वे अलग हुए, दोनों कुछ पल वैसे ही खड़े रहे।
आर्या की आँखें नीचे थीं।
विराज उसके माथे से अपना माथा टिकाकर बोला—
“छह महीने के लिए ये बहुत कम था।”
आर्या की हँसी बेहद धीमी थी।
“तो किसने कहा सिर्फ एक ही मिलेगा?”
बाहर बारिश अब और तेज हो गई थी।
कुछ देर बाद दोनों balcony के पास floor cushions पर बैठ गए।
आर्या विराज के कंधे से लगी हुई थी।
“तुम्हें जाना कब है?” उसने पूछा।
“तीन दिन बाद।”
आर्या तुरंत उसकी तरफ मुड़ी।
“इतनी जल्दी?”
“काम है।”
उसका चेहरा उतर गया।
विराज ने उसकी उंगलियाँ पकड़ लीं।
“लेकिन इस बार छह महीने नहीं।”
“Promise?”
“Promise।”
आर्या कुछ देर उसकी उंगलियों को देखती रही।
फिर बोली—
“जानते हो, distance में सबसे बुरा क्या था?”
“क्या?”
“कभी-कभी मुझे तुम्हारा चेहरा याद नहीं आता था।”
विराज ने उसकी तरफ देखा।
“फिर?”
“तुम्हारी मौजूदगी याद आती थी।”
“मतलब?”
आर्या ने उसका हाथ अपने दोनों हाथों के बीच ले लिया।
“तुम्हारे पास बैठना। बिना वजह हाथ पकड़ना। मेरी बात सुनते हुए तुम्हारा मुझे देखना।”
वह हल्के से मुस्कुराई।
“और ये…”
“क्या?”
आर्या थोड़ा और उसके करीब आ गई।
“इतना करीब बैठना कि कुछ बोलने की जरूरत ही न पड़े।”
विराज ने उसके माथे पर धीमा चुंबन दिया।
फिर दोनों चुप हो गए।
कई मिनट तक।
मगर इस बार चुप्पी खाली नहीं थी।
वह उन सभी बातों से भरी थी जो दूरी में कहना मुश्किल था।
आर्या ने आँखें बंद कर लीं और सिर उसके सीने पर रख दिया।
विराज ने उसकी उंगलियाँ अपनी उंगलियों में फँसा लीं।
रात आगे बढ़ रही थी।
बारिश धीरे-धीरे शांत हो रही थी।
मगर महीनों से दबे उनके एहसास अब पहली बार पूरी तरह जाग चुके थे।
कभी-कभी एक sensual love story किसी बड़ी घटना में नहीं होती।
वह उस पल में होती है जब कोई आपके चेहरे से बाल हटाते हुए एक सेकंड ज्यादा रुक जाए।
जब किसी की बाँहों में लौटकर अचानक समझ आए कि आपने सिर्फ उस इंसान को नहीं…
उसके स्पर्श में मिलने वाले अपने सुकून को भी बहुत याद किया था।







0 Comments