सातवीं सालगिरह की रात – Romantic Husband Wife Love Story in Hindi

 

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वह संदेश जिसने शाम बदल दी

निहारिका को अपनी शादी की सातवीं सालगिरह की तारीख याद थी।

आदित्य को भी याद होगी—उसे उम्मीद थी।

लेकिन शाम के आठ बज चुके थे और घर में सिर्फ घड़ी की टिक-टिक थी।

डाइनिंग टेबल पर दो प्लेटें लगी थीं। बीच में रखी मोमबत्ती उसने आधे घंटे पहले ही बुझा दी थी।

फोन पर आदित्य का आखिरी संदेश था—

“ थोड़ा लेट हो जाऊँगा।”

बस।

न कोई दिल।
न कोई “ हैप्पी एनिवर्सरी।”
न कोई ऐसी बात जिससे लगे कि आज का दिन सामान्य दिनों से अलग था।

निहारिका ने आईने में खुद को देखा।

गहरे मरून रंग की साड़ी, खुले बाल और वही छोटे झुमके जो आदित्य ने शादी के पहले साल में दिए थे।

वह खुद पर हल्का-सा हँस दी।

“शायद ये सब करने की उम्र निकल गई।”

तभी फोन फिर चमका।

आदित्य का संदेश था—

“ बेडरूम की अलमारी का ऊपर वाला दराज़ खोलो।”

निहारिका की भौंहें सिकुड़ गईं।

दराज़ में एक छोटा-सा काला डिब्बा था।

उसके अंदर कोई महँगा गहना नहीं था।

सिर्फ उनकी शादी के समय की एक पुरानी तस्वीर और पीछे आदित्य की लिखावट—

“ सात साल बाद भी… मुझे सबसे खूबसूरत तुम इसी तरह देखती हुई लगती हो।”

निहारिका कुछ पल तस्वीर को देखती रही।

अगला संदेश आया—

“ अब छत पर आओ।”

उसके होंठों पर अनचाही मुस्कान उतर आई।

सात साल पुरानी नज़र

छत पर पहुँचते ही निहारिका रुक गई।

बहुत बड़ी decoration नहीं थी।

बस कुछ पीली fairy lights, एक छोटा-सा table, दो coffee mugs और speaker पर बहुत धीमा संगीत।

और उनके बीच खड़ा था आदित्य।

White shirt की बाँहें हल्की-सी मुड़ी हुई थीं। हाथ में उसकी पसंद के सफेद फूल थे।

“तुम्हें लगा मैं भूल गया?” उसने पूछा।

निहारिका ने फूल लेते हुए कहा—

“आठ बजे तक तो यही लगा था।”

“थोड़ा drama जरूरी था।”

“सात साल बाद सीख रहे हो?”

“सात साल बाद तुम्हें impress करना पहले से मुश्किल है।”

निहारिका हँस दी।

आदित्य उसे कुछ देर देखता रहा।

इतनी देर कि निहारिका को अपनी नज़रें नीचे करनी पड़ीं।

“क्या?” उसने पूछा।

“कुछ नहीं।”

“फिर ऐसे क्यों देख रहे हो?”

आदित्य उसके करीब आया।

“क्योंकि बहुत दिनों बाद मैंने तुम्हें सिर्फ देखा है।”

उसकी बात सुनकर निहारिका की मुस्कान थोड़ी धीमी हो गई।

आदित्य की उँगलियाँ उसके कंधे के पास पहुँचीं और साड़ी का हल्का-सा खिसका हुआ पल्लू ठीक कर दिया।

स्पर्श बहुत साधारण था।

फिर भी निहारिका की साँस एक पल के लिए रुक गई।

वह शायद भूल चुकी थी कि इतने वर्षों बाद भी उसके एक छोटे-से स्पर्श में वही पुरानी बेचैनी बची हुई थी।

“तुमने वही साड़ी पहनी है,” आदित्य ने कहा।

“तुम्हें याद है?”

“तुमसे जुड़ी कई बातें याद हैं। बस… जताना कम हो गया।”

निहारिका ने उसकी आँखों में देखा।

“यही तो समस्या थी।”

संगीत चलता रहा।

लेकिन अब शाम सिर्फ anniversary surprise नहीं रही थी।

कुछ पुरानी बातें दरवाजा खटखटा चुकी थीं।

“हम कब इतने दूर हो गए?”

दोनों छत की दीवार के पास बैठ गए।

नीचे शहर की रोशनियाँ थीं। ऊपर हल्के बादल।

आदित्य ने coffee का cup उसकी तरफ बढ़ाया।

“एक बात पूछूँ?”

“पूछो।”

“तुम पिछले कुछ महीनों से मुझसे नाराज़ हो?”

निहारिका ने cup की तरफ देखा।

“नाराज़ नहीं।”

“फिर?”

कुछ पल चुप रहने के बाद उसने कहा—

“मैं अकेली महसूस करती हूँ।”

आदित्य की आँखों से हल्की मुस्कान गायब हो गई।

निहारिका बोलती गई—

“तुम घर पर रहते हो… फिर भी कभी-कभी लगता है तुम यहाँ होते ही नहीं। ऑफिस की बातें, फोन, काम, जिम्मेदारियाँ… हम एक ही bed पर सोते हैं, लेकिन कई दिनों तक ठीक से बात भी नहीं करते।”

“निहा…”

“मैं शिकायत नहीं कर रही।”

उसकी आवाज़ धीमी हो गई।

“बस कभी-कभी मुझे वो आदमी याद आता है जो मेरी बात सुनने के लिए रात के दो बजे तक जागता था।”

आदित्य ने कुछ नहीं कहा।

उसने बस उसका हाथ पकड़ लिया।

निहारिका ने इस बार हाथ नहीं खींचा।

“मैंने सोच लिया था कि शादी के इतने साल बाद शायद यही normal होता है,” उसने कहा।

आदित्य ने उसकी उंगलियों को अपने हाथ में कसकर थाम लिया।

“Normal हो सकता है।”

फिर उसकी तरफ देखकर बोला—

“लेकिन मुझे ऐसा normal नहीं चाहिए।”

हवा से निहारिका के बाल चेहरे पर आ गए।

आदित्य ने उन्हें धीरे से हटाया।

उसकी उंगलियाँ इस बार गाल के पास एक पल ज्यादा ठहरीं।

निहारिका ने उसकी ओर देखा।

वही आदमी।

वही नज़र।

बस बीच में सात साल की जिंदगी आ गई थी।

“मैं तुम्हें miss करता हूँ,” आदित्य ने कहा।

निहारिका हल्का-सा हँसी।

“मैं तो रोज सामने रहती हूँ।”

“शायद इसलिए और ज्यादा।”

अब उनकी नज़दीकी में पहले जैसी झिझक नहीं थी।

सिर्फ पहचान थी।

वही पुराना गीत

अचानक speaker पर वही गीत बजने लगा जिस पर उन्होंने अपनी शादी के बाद पहली बार साथ dance किया था।

निहारिका ने आदित्य की तरफ देखा।

“ये भी याद था?”

आदित्य खड़ा हो गया।

“सब।”

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

“Madam?”

निहारिका हँसते हुए उठी।

“आपको dance आता भी है?”

“सात साल पहले भी नहीं आता था।”

उसने अपना हाथ उसके हाथ में रख दिया।

आदित्य का दूसरा हाथ बहुत सहजता से उसकी कमर के पास आ गया।

निहारिका उसके करीब खड़ी थी।

इतनी करीब कि उसके perfume की खुशबू आदित्य की familiar fragrance में घुल रही थी।

वे मुश्किल से dance कर रहे थे।

बस संगीत के साथ थोड़ा-सा हिल रहे थे।

लेकिन दोनों को शायद यही चाहिए था।

निहारिका ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा।

आदित्य ने बहुत धीमे पूछा—

“अब भी नाराज़ हो?”

“थोड़ी।”

“कितनी?”

“इतनी कि आसानी से माफ़ नहीं करूँगी।”

आदित्य मुस्कुराया।

“तो मुझे मेहनत करनी पड़ेगी।”

“करो।”

निहारिका ने पहली बार उस रात अपनी नज़रें उसकी आँखों से हटाकर उसके सीने पर टिका दीं।

कुछ देर बाद उसने अपना सिर वहीं रख दिया।

आदित्य ने उसे और पास कर लिया।

संगीत, हवा और उनके बीच की गर्माहट…

कुछ मिनटों के लिए दुनिया बहुत छोटी हो गई।

सिर्फ दोनों तक।

निहारिका ने सिर उठाया।

उनके चेहरे अब बहुत करीब थे।

“आदित्य…”

“हूँ?”

“तुम मुझे ऐसे देखना कब बंद कर दिए थे?”

वह कुछ पल चुप रहा।

“शायद जब मुझे लगने लगा कि तुम हमेशा मेरे पास रहोगी।”

“और आज?”

आदित्य ने उसके चेहरे को बहुत हल्के से अपनी हथेली में लिया।

“आज याद आया कि किसी का हमेशा पास होना… उसे नजरअंदाज करने की permission नहीं होता।”

निहारिका की आँखें नरम पड़ गईं।

इस बार जब आदित्य थोड़ा झुका, उसने खुद दूरी कम कर दी।

उनका चुंबन छोटा था।

शांत।

लेकिन उसमें सात साल की पहचान थी और कई महीनों की छूटी हुई नजदीकी।

प्यार खत्म नहीं हुआ था

रात थोड़ी और गहरी हो चुकी थी।

दोनों अब balcony के पास खड़े थे।

निहारिका आदित्य की बाँहों के भीतर थी। उसका सिर उसके कंधे के पास और उंगलियाँ उसकी shirt के cuff से खेल रही थीं।

“एक promise करो,” उसने कहा।

“क्या?”

“अगली anniversary तक इंतज़ार नहीं करोगे।”

आदित्य हँसा।

“किस चीज़ के लिए?”

निहारिका ने उसकी तरफ देखा।

“मुझे याद दिलाने के लिए कि मैं सिर्फ घर संभालने वाली तुम्हारी पत्नी नहीं हूँ।”

आदित्य की मुस्कान शांत हो गई।

“तुम वो लड़की भी हो जिससे मैं प्यार करता था।”

“था?”

आदित्य तुरंत समझ गया।

“करता हूँ।”

“Better.”

वह हँसी।

आदित्य ने उसके माथे पर हल्का-सा चुंबन दिया।

कुछ देर बाद निहारिका ने पूछा—

“और मैं?”

“तुम क्या?”

“क्या मैं बदल गई हूँ?”

आदित्य ने उसे ऊपर से नीचे नहीं, सीधे आँखों में देखकर कहा—

“हाँ।”

निहारिका ने भौंहें उठाईं।

“कैसे?”

“पहले तुम मेरी चाहत थीं।”

उसने उसे थोड़ा और करीब कर लिया।

“अब तुम मेरा घर भी हो।”

निहारिका कुछ नहीं बोली।

बस उसके सीने से लग गई।

सात साल में बहुत कुछ बदल चुका था।

चेहरे पर थोड़ी maturity आ गई थी। जिम्मेदारियाँ बढ़ गई थीं। देर रात की बातें कम हो गई थीं। बिना वजह हाथ पकड़ना भी कहीं routines के बीच खो गया था।

लेकिन प्यार खत्म नहीं हुआ था।

वह बस परिचित हो गया था।

इतना परिचित कि दोनों उसकी मौजूदगी देखना भूल गए थे।

उस रात उन्होंने कोई नया रिश्ता शुरू नहीं किया।

उन्होंने बस पुराने रिश्ते को फिर से महसूस किया।

और शायद एक खूबसूरत Husband Wife Love Story in Hindi हमेशा पहली मुलाकात या पहली मोहब्बत की कहानी नहीं होती।

कभी-कभी सबसे गहरी प्रेम कहानी वह होती है…

जहाँ दो लोग वर्षों बाद भी एक-दूसरे की तरफ देखकर यह तय करते हैं—

“हम अभी खत्म नहीं हुए हैं।”

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